आदिल अहमद
डेस्क. यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं की आवाज बुलंद करने की मुहिम ‘मी टू’ की तर्ज पर अब पुरुषों ने भी ‘मैन टू’ अभियान शुरू किया है। साल 2017 में यौन उत्पीड़न के केस में निचली अदालत से बरी हो चुके एक पूर्व फ्रांसीसी राजनयिक समेत 15 लोगों के एक समूह ने यह अभियान लांच करते हुए पुरुषों से अपील की है कि वे महिलाओं द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के बारे में खुलकर बोलें।
एक एनजीओ ‘चिल्ड्रेन राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेयर्ड पैरेंटिंग’ (क्रिस्प) ने यह अभियान ‘मी टू’ के तहत महिलाओं द्वारा पुरुषों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने और अन्य मसलों के विरोध में शनिवार को शुरू किया। इस मौके पर क्रिस्प ने राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार वी. जहागीरदार ने कहा कि यह ग्रुप कानून को महिला-पुरुष के लिए एक समान (जेंडर न्यूट्रल) बनाए जाने को लेकर संघर्ष करेगा तथा ‘मी टू’ अभियान के तहत झूठे केस दर्ज कराने वाली महिलाओं को दंडित करने की भी मांग करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘मी टू’ एक अच्छा अभियान है लेकिन झूठे आरोप लगाकर किसी को फंसाने के लिए इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘इस अभियान का परिणाम पुरुषों को बदनाम करने के रूप में भी सामने आया है, जो समाज में अपनी प्रतिष्ठा बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।’ बाद में पत्रकारों से बातचीत में जहागीरदार ने कहा कि ‘मी टू’ के तहत पीड़िता दशकों पुरानी घटनाओं को सामने ला रही हैं, जबकि ‘मेन टू’ में हालिया घटनाओं को उजागर किया जाएगा।
‘मी टू’ अभियान के बारे में उनका कहना था कि यदि कोई महिला वाकई में यौन दुर्व्यवहार का शिकार हुई है तो उसे अपनी कहानी सोशल मीडिया में बताने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए। अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न के केस में अदालत से बरी हो चुके पूर्व फ्रांसीसी राजनयिक पास्कल मजूरियर ने कहा कि ‘मैन टू’ अभियान ‘मी टू’ के विरोध में नहीं है, बल्कि उन पुरुषों की समस्या के समाधान को लेकर है, जो महिलाओं के अत्याचार के खिलाफ बोल नहीं पाते।
उन्होंने कहा, ‘पुरुषों में भी दर्द है। वे भी परेशान हैं, लेकिन वे महिलाओं तथा उनके दुराचार के खिलाफ सामने नहीं आते हैं। मी टू के तहत पुरुषों पर लगाए जाने वाले झूठे आरोपों से बच्चे ही नहीं, बल्कि परिवारों का भी भविष्य बर्बाद होता है। महिलाओं के संरक्षण के लिए कानून बनाएं, यह अच्छी बात है लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आधी मानव जाति पुरुष है।’
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