आफताब फारुकी
नई दिल्ली. राजनीती में मानवीय मूल्यों की लगता है हत्या हो चुकी है। राजनीती में एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप तो लगते रहते थे। मगर इस बार लोकसभा चुनाव 2019 में लगता है मर्यादा की सभी सीमाये पार हो जायेगी। पहले चौकीदार चोर है का नारा देकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरना शुरू किया था। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के द्वारा शहीद हेमंत करकरे पर ऐसा विवादस्पद बयान दिया कि भाजपा खुद उस बयान पर फसने की स्थिति में आ गई। जब कोई रास्ता भाजपा को नही नज़र आया तो उसने बयान से किनारा कर लिया। इस बीच गिरिराज सिंह जैसे भाजपा नेता विवादित बयान देते रहे मगर बड़ा विवादित बयान उन्होंने मुस्लिम धर्म के पैगम्बर को लेकर दे दिया। अभी मामला चल ही रहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर 1 जैसे शब्दों का प्रयोग कर एक नये विवाद को जन्म दे दिया है।
प्रेस कांफ्रेस के दौरान आतिशी मार्लेन फूट-फूटकर रो पड़ीं। ‘नो योर कंडीडेट’ टाइटिल वाले इस पर्चे में आतिशी के खिलाफ अपमानजनक बातें लिखीं गई हैं। आम आदमी पार्टी ने इसे लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंफलेट को पढ़ते हुए हमें शर्म आ रही है। जब गौतम गंभीर देश के लिए खेलते हुए चौके और छक्के मारते थे, तब हम तालियां बजाते थे। मगर हमने कभी सपने में नहीं सोचा था कि यह आदमी चुनाव जीतने के लिए इस स्तर तक जा सकता है।
गौतम गंभीर ने किया खंडन
गौतम गंभीर ने इस प्रकरण को लेकर ट्वीट किया और लिखा कि अरविंद केजरीवाल और आतिशी के लिए मेरी दूसरी चुनौती। मैं घोषित करता हूं कि अगर ये साबित हुआ कि मैंने ये किया है तो मैं अपनी उम्मीदवारी तत्काल वापस ले लूंगा। अगर नहीं, तो क्या आप राजनीति छोड़ेंगे? ‘मैं शर्मिंदा हूं कि अरविंद केजरीवाल जैसा शख़्स मेरा मुख्यमंत्री है।
कपिल मिश्रा ने कहा केजरीवाल का किया है सब
वही आम आदमी पार्टी के बागी विधायक और अब भाजपा के खेमे में खड़े कपिल मिश्रा ने इसको लेकर अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधा है और कहा है कि आतिशी को अपने कुछ आंसू बचा कर रखना चाहिये जो चुनाव हारने पर काम आयेगे। उनके इस बयान पर वैसे तो पक्ष और विपक्ष से कटु टिप्पणी आ रही है। मगर उन्होंने इस घटना का षड्यंत्रकर्ता अरविन्द केजरीवाल को ठहराया है।
कैसे चलेगा पता, किसने बाटे पम्पलेट
वैसे इस प्रकार के कृत्यों पर बहुत अधिक जांच में कुछ सामने नहीं आता है और समय के साथ ही इस प्रकार के मामलो पर वक्त की धुल चढ़ जाती है। इस प्रकरण में भी जानकार मानते है कि ऐसा ही कुछ होने वाला है। जाच में बहुत कुछ निष्कर्ष निकल कर सामने नही आने वाला है। वही आतिशी जैसी प्रत्याशी के साथ इस प्रकार की घटना पर सभ्य समाज जहा स्तब्ध है वही मामले में भर्त्सना भी हो रही है।
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