आदिल अहमद
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास HC की चुनाव आयोग पर ‘हत्या के आरोप’ वाली टिप्पणी पर कहा है कि यह टिप्पणी कठोर और अनुचित थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी जजमेंट का पार्ट नही थी। SC ने चुनाव आयोग की याचिका पर आदेश देने से इन्कार किया। अदालत ने कहा कि जजों को संयम बरतने की जरूरत है। अदालती कार्यवाहियों में कड़ी टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। अदालतों में खुली पहुँच संवैधानिक स्वतंत्रता के लिए एक मूल्यवान सुरक्षा है।प्रेस की स्वतंत्रता बोलने और अभिव्यक्ति की संवैधानिक स्वतंत्रता का एक पहलू है।
कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की महिमा, जिम्मेदारी और उसके पालन की सराहना की। साथ ही कहा कि आयोग की शिकायत वैसे तो हाईकोर्ट के रिकॉर्ड पर नहीं है। कोर्ट ने इस नसीहत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जो चीज रिकॉर्ड पर नहीं है उसे डिलीट या रिमूव करने का कोई मतलब नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार प्रेस को भी है ।
ईदुल अमीन डेस्क: सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने संविधान की प्रस्तावना में…
निलोफर बानो डेस्क: उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के…
निलोफर बानो डेस्क: उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के…
फारुख हुसैन डेस्क: उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के…
शफी उस्मानी डेस्क: एसटीएफ ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हथियार सप्लाई करने वाले एक आरोपी…
आफताब फारुकी डेस्क: महाराष्ट्र में चुनावी जीत के बाद महायुति गठबंधन में शामिल एनसीपी (अजित…