आदिल अहमद
डेस्क: इसराइल और हमास के बाच लागू हुए युद्ध विराम के बाद सोमवार पहला दिन था, जब राहत कर्मियों और आम लोगों ने व्यापक विनाश के बारे में बताया है। ग़ज़ा के सिविल डिफ़ेंस एजेंसी के पास ग़ज़ा पट्टी में आपातकालीन सेवाओं की ज़िम्मेदारी है।
युद्ध विराम लागू होने के बाद ग़ज़ा से ताज़ा तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिसमें बीते क़रीब पंद्रह महीनों के दौरान इसराइली हमले के बाद के हालात दिख रहे हैं। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया था कि ग़ज़ा में 60 फ़ीसदी ढांचे नष्ट हो चुके हैं या उन्हें नुक़सान हुआ है।
फ़लस्तीनी विस्थापितों के लिए काम कर रही संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनआरडब्लूए के कार्यवाहक निदेशक सैम रोज़ ने कहा है कि ग़ज़ा को फिर से बनाने में लंबा वक़्त लगेगा। उनका कहना है, ‘हम केवल भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, इमारतों, सड़कें और बुनियादी ढांचे की बात नहीं कर रहे हैं। हमारे पास निजी लोग, परिवार और समुदाय हैं, जिन्हें फिर से खड़ा करने की ज़रूरत है।’
रविवार को इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौता लागू होने के बाद कम से कम 1,500 लॉरियां ग़ज़ा पहुंची हैं, जिनमें बेहद ज़रूरी भोजन, टेंट, कंबल, गद्दे और सर्दियों के कपड़े हैं। ये लॉरियाँ कई महीनों से गज़ा के बाहर फंसी हुई थीं।
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